मैं अपने बचपन में गाय का दूध कच्चा ही पी जाया करता था. जब अपने गावं में ग्वाले के यहां से दूध लाने जाया करता था तो दूध दूहने के दौरान ही आधा-एक ग्लास हमें बच्चा समझ कर ऐसे ही पकड़ा दिया जाता था. दूहने के समय ही जो दूध निकलता है वह पहले से ही हल्का गरम होता है.
कहा जाता था कि निकालते वक्त ही अगर उसे पी जाया जाए तो उसमें प्रोटीन ही प्रोटीन होती है. यह दूध हमारे हड्डियों को काफी मजबूत बनाती है. यह बात तो काफी पुरानी हो गई. लेकिन अभी के समय में अगर आपको दूध की शक्तियों का फायदा उठाना है तो पहले खुद दूध की शक्तियों को जागृत करना होगा.
यह तो दूध की बात थी, अभी के समय में तो हवा और पानी भी काफी सोच-समझ कर लेना होता है. हम सभी हमेशा परेशान रहते हैं कि अपने बच्चों को ऐसा कौन सा ड्रिंक दें जिससे उसकी हड्डियां और दिमाग मजबूत बने और बच्चा स्वस्थ व तंदरूस्त रहे. इस तरह के बहुत सारे प्रोडक्ट आजकल मार्केट में आ चुके हैं जो दूध की शक्तियों को दोगुना, तिगुना करने का दावा करते हैं. उदाहरण के लिए एक एड को आप लोगों ने देखा होगा, जिसमें एक महिला अपने महिला साथी से यह पूछती दिखाई जाती है कि ‘दूध तो पीया-मगर उसका प्रोटीन मिला या नहीं’. फिर कहती है ‘दूध पीने का फायदा तभी है जब इसमें फलां-फलां के दो चम्मच मिलाया जाए’.
इस समय पर्यावरण का जो हाल हम सभी ने मिलकर किया हुआ है खुद भी किसी भी खाने-पीने की चीजों पर विश्वास नहीं कर पाते हैं. आए दिन दूध में मिलावटों की खबरें तो मिलती रहती है. जब ग्वाले के यहां से पीने के लिए दूध लाया करते थे तो एक ही तरह के दूध के बारे में जानते थे. जबकि इस समय पैकेट में टोंड, हाफ टोंड, क्रीम, फुल क्रीम जैसे कई प्रकार के दूध बाजार में मिलते हैं और हम उसे अपने जरूरत के हिसाब से खरीद कर लाते हैं.
अब इसे विडंबना कहें या मजबूरी कि दूध की गुणवत्ता को लेकर संशय में रहते हुए भी हम सभी अपने बच्चों को बाजार से दूध खरीद कर पिलाते ही हैं, लेकिन उसी संशय को खत्म करने के लिए बाहरी प्रोटीनयुक्त पाउडरों का इस्तेमाल भी करते हैं, ताकि दूध में प्रोटीन हो न हो बाहरी सप्लीमेंट इस कमी को दूर कर देगा और हमारे बच्चों को जरूरी प्रोटीन मिल सकेगा. कुल मिलाकर यही समझ में आता है कि दूध की ताकत पर अब भरोसा नहीं रह गया है. दूध को पीने से पहले उसकी ताकत को जागृत करने के लिए बाहरी प्रोटीनयुक्त पाउडर या द्रव मिलाएं फिर पीयें.
कहा जाता था कि निकालते वक्त ही अगर उसे पी जाया जाए तो उसमें प्रोटीन ही प्रोटीन होती है. यह दूध हमारे हड्डियों को काफी मजबूत बनाती है. यह बात तो काफी पुरानी हो गई. लेकिन अभी के समय में अगर आपको दूध की शक्तियों का फायदा उठाना है तो पहले खुद दूध की शक्तियों को जागृत करना होगा.
यह तो दूध की बात थी, अभी के समय में तो हवा और पानी भी काफी सोच-समझ कर लेना होता है. हम सभी हमेशा परेशान रहते हैं कि अपने बच्चों को ऐसा कौन सा ड्रिंक दें जिससे उसकी हड्डियां और दिमाग मजबूत बने और बच्चा स्वस्थ व तंदरूस्त रहे. इस तरह के बहुत सारे प्रोडक्ट आजकल मार्केट में आ चुके हैं जो दूध की शक्तियों को दोगुना, तिगुना करने का दावा करते हैं. उदाहरण के लिए एक एड को आप लोगों ने देखा होगा, जिसमें एक महिला अपने महिला साथी से यह पूछती दिखाई जाती है कि ‘दूध तो पीया-मगर उसका प्रोटीन मिला या नहीं’. फिर कहती है ‘दूध पीने का फायदा तभी है जब इसमें फलां-फलां के दो चम्मच मिलाया जाए’.
इस समय पर्यावरण का जो हाल हम सभी ने मिलकर किया हुआ है खुद भी किसी भी खाने-पीने की चीजों पर विश्वास नहीं कर पाते हैं. आए दिन दूध में मिलावटों की खबरें तो मिलती रहती है. जब ग्वाले के यहां से पीने के लिए दूध लाया करते थे तो एक ही तरह के दूध के बारे में जानते थे. जबकि इस समय पैकेट में टोंड, हाफ टोंड, क्रीम, फुल क्रीम जैसे कई प्रकार के दूध बाजार में मिलते हैं और हम उसे अपने जरूरत के हिसाब से खरीद कर लाते हैं.
अब इसे विडंबना कहें या मजबूरी कि दूध की गुणवत्ता को लेकर संशय में रहते हुए भी हम सभी अपने बच्चों को बाजार से दूध खरीद कर पिलाते ही हैं, लेकिन उसी संशय को खत्म करने के लिए बाहरी प्रोटीनयुक्त पाउडरों का इस्तेमाल भी करते हैं, ताकि दूध में प्रोटीन हो न हो बाहरी सप्लीमेंट इस कमी को दूर कर देगा और हमारे बच्चों को जरूरी प्रोटीन मिल सकेगा. कुल मिलाकर यही समझ में आता है कि दूध की ताकत पर अब भरोसा नहीं रह गया है. दूध को पीने से पहले उसकी ताकत को जागृत करने के लिए बाहरी प्रोटीनयुक्त पाउडर या द्रव मिलाएं फिर पीयें.

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