मैं एक सवाल सबसे पहले अपने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पूछना चाहता हूं कि हम जनता को आपने कई सपने दिखाए हैं. उन सपनों के हाईटेक लिस्ट में शायद नंबर एक पर बुलेट ट्रेन भी है. मोदी जी आप हमारा सपना कब साकार करेंगे. हम कब बुलेट ट्रेन के सफर का मजा लेंगे. हमें ये विदेशी सपने दिखाकर कहीं आप ठगने का काम तो नहीं कर रहे हैं.
दोस्तों, हम सभी के पीएम से सवालों की लिस्ट तो शायद बहुत लंबी होगी. हो भी क्यों न. नरेन्द्र मोदी शायद देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री होंगे जिन्होंने इकट्ठे इतने सारे सपने दिखा दिए. लेकिन हम जनता को तो आश्वस्त होना चाहिए कि इन नेताओं के वादों में आज तक तो सच्चाई दिखी नहीं. फिर आज हम पीएम और केवल पीएम से इतने सारे आश लगा कर क्यों बैठे हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि पीएम मोदी ने अपने आप में सभ्य छवि, दिन-रात की मेहनत, लगन, कार्य के प्रति ईमानदार होने का प्रमाण पूरी दुनिया समेत हमे भी दे दिया है.
एक बात बताईए, अपने पीएम नरेन्द्र भाई मोदी कुछ अजीब किस्म के इंसान नहीं हैं. एक तो अपने शपथ ग्रहण समारोह में बगैर सोचे-समझे दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों को आने का न्योता दे दिया. आश्चर्य की बात तो यह है कि जिन-जिन को न्योता भेजा गया उन्होंने आने से मना भी नहीं किया और लगभग सभी आमंत्रित देश के राष्ट्राध्यक्ष पहुंचे. लालकिले से अपने पहले ही अभिभाषण में इतने बड़े ओहदे पर होने के बावजूद चर्चा की तो किसकी - शौचालय की, साफ-सफाई की. अपने कार्यकाल के पहले ही गणतंत्र दिवस पर सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को न्योता दे दिया. यहां तक की बराक ओबामा से गहरी मित्रता भी कर ली. एकाएक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर से हो आए. इस तरह के कई फैसले ताबर-तोड़ लिए जिसकी शायद किसी को कल्पना नहीं थी या यूं कहें कि अब तक के किसी भी पीएम ने ऐसा करके दिखाया नहीं था. भाई साहब, एक बात तो मैं कह सकता हूं कि जो पीएम अपने पद संभालने के बाद से ही शायद चैन की नींद न ली हो उसमें कुछ कर गुजरने की जिद तो होगी ही. ऐसा करने का जो शायद आजतक किसी ने न किया हो.
बुरे वो नहीं बुरे हम हैं
बुराई पीएम में नहीं बुराई हममे है. जिन्होंने शौचालय की बात की बुरे वो नहीं बुरे हम हैं, जिन्होंने साफ-सफाई की बात की बुरे वो नहीं बुरे हम हैं, जिन्होंने बुलेट ट्रेन लाने की बात की बुरे वो नहीं बुरे हम हैं, जिन्होंने डिजिटल इंडिया की बात की बुरे वो नहीं बुरे हम हैं, जिन्होंने मेक इन इंडिया की बात की बुरे वो नहीं बुरे हम हैं.
दोस्तों मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि पीएम मोदी ने अभी हाल ही में हम सभी को तोहफा देते हुए नई दिल्ली-वाराणसी रूट पर हाईटेक ट्रेन महामना एक्सप्रेस का शुभारंभ किया था. यह ट्रेन जिन सुविधाओं से लैस की गई थी, हम सभी को किसी विदेशी ट्रेन का अनुभव कराने के लिए फिलहाल काफी थी. लेकिन आज हम सबों ने इस ट्रेन का जो हाल किया है शायद यह ट्रेन भी मन ही मन पीएम मोदी से यह पूछ रही हो कि ‘‘किन बलात्कारियों के बीच मुझे छोड़ दिया’’.
महामना एक्सप्रेस के अंदर की जो हालिया तस्वीरें सामने आ रही हैं वो हम सभी से एक सवाल कर रही है कि क्या हम बुलेट ट्रेन में चढ़ने के लायक हैं. महामना एक्सप्रेस से जब यात्री उतरते हैं उसके बाद जो दृश्य इस ट्रेन के अंदर का होता है शायद आपको यह ऐहसास करा दे कि यह ट्रेन कूड़ा-कचरा ढोने के लिए बनी है. जबकि इस ट्रेन के हर हिस्से में डस्टबीन मौजूद है.
सवाल बस एक है. क्या हम कभी नहीं सुधरेंगे ?
केवल साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए सरकार दिन-रात एक किए हुई है. केन्द्र सरकार ने ऐसी मुहिम चलाई हुई है कि 24 घंटे में कभी न कभी इसके प्रति जागरूक करने से संबंधित विज्ञापन या संदेश हम-आपको मिल ही जाती है. फिर भी हम हैं कि सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं.
गंदे हम, दोषी पीएम !
आजकल ट्रेंड बन चुका है कि किसी भी तरह की बात हो सीधे दोष पीएम पर मढ़ दो. पीएम ने ऐसा बोला, ये नहीं किया, वो नहीं किया, पीएम केवल भाषण देते हैं करते कुछ नहीं आदि. दोस्तों जितना ही उन्होंने किया है अब तक, क्या हम उन्हीं सुविधाओं का लाभ ले पाने के योग्य हैं. अगर नहीं तो दोषी पीएम नहीं गंदे हम हैं. हमें कोई हक नहीं है पीएम पर दोष मढ़ने का.
एक छोटा सा उदाहरण देश के विकास के बारे में देना चाहूंगा जिनसे समूचा देश अपने पीएम पर गर्व महसूस कर रहा है. पीएम के द्वारा लिये गए फैसलों का ही नतीजा है कि आज हम दूसरे देश को मेक इन इंडिया मेट्रो के डिब्बे एक्सपोर्ट कर रहे हैं. अपने देश में बुलेट ट्रेन पर काम शुरू हो चुका है. कई शहर को स्मार्ट सिटी बनाने पर काम चल रहा है. ऐसे एक नहीं कई फैसले हैं जिनका परिणाम व लाभ आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा. जरूरत है तो बस हमें अपने आप को जागरूक व अपडेट करने का. जरूरत है हर जगह साफ-सफाई का ध्यान रखने का. अगर बुलेट ट्रेन पर चढ़ने का सपना है तो उसके लायक भी बनके दिखाना पड़ेगा.
दोस्तों, हम सभी के पीएम से सवालों की लिस्ट तो शायद बहुत लंबी होगी. हो भी क्यों न. नरेन्द्र मोदी शायद देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री होंगे जिन्होंने इकट्ठे इतने सारे सपने दिखा दिए. लेकिन हम जनता को तो आश्वस्त होना चाहिए कि इन नेताओं के वादों में आज तक तो सच्चाई दिखी नहीं. फिर आज हम पीएम और केवल पीएम से इतने सारे आश लगा कर क्यों बैठे हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि पीएम मोदी ने अपने आप में सभ्य छवि, दिन-रात की मेहनत, लगन, कार्य के प्रति ईमानदार होने का प्रमाण पूरी दुनिया समेत हमे भी दे दिया है.
एक बात बताईए, अपने पीएम नरेन्द्र भाई मोदी कुछ अजीब किस्म के इंसान नहीं हैं. एक तो अपने शपथ ग्रहण समारोह में बगैर सोचे-समझे दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों को आने का न्योता दे दिया. आश्चर्य की बात तो यह है कि जिन-जिन को न्योता भेजा गया उन्होंने आने से मना भी नहीं किया और लगभग सभी आमंत्रित देश के राष्ट्राध्यक्ष पहुंचे. लालकिले से अपने पहले ही अभिभाषण में इतने बड़े ओहदे पर होने के बावजूद चर्चा की तो किसकी - शौचालय की, साफ-सफाई की. अपने कार्यकाल के पहले ही गणतंत्र दिवस पर सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को न्योता दे दिया. यहां तक की बराक ओबामा से गहरी मित्रता भी कर ली. एकाएक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर से हो आए. इस तरह के कई फैसले ताबर-तोड़ लिए जिसकी शायद किसी को कल्पना नहीं थी या यूं कहें कि अब तक के किसी भी पीएम ने ऐसा करके दिखाया नहीं था. भाई साहब, एक बात तो मैं कह सकता हूं कि जो पीएम अपने पद संभालने के बाद से ही शायद चैन की नींद न ली हो उसमें कुछ कर गुजरने की जिद तो होगी ही. ऐसा करने का जो शायद आजतक किसी ने न किया हो.
बुरे वो नहीं बुरे हम हैं
बुराई पीएम में नहीं बुराई हममे है. जिन्होंने शौचालय की बात की बुरे वो नहीं बुरे हम हैं, जिन्होंने साफ-सफाई की बात की बुरे वो नहीं बुरे हम हैं, जिन्होंने बुलेट ट्रेन लाने की बात की बुरे वो नहीं बुरे हम हैं, जिन्होंने डिजिटल इंडिया की बात की बुरे वो नहीं बुरे हम हैं, जिन्होंने मेक इन इंडिया की बात की बुरे वो नहीं बुरे हम हैं.
दोस्तों मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि पीएम मोदी ने अभी हाल ही में हम सभी को तोहफा देते हुए नई दिल्ली-वाराणसी रूट पर हाईटेक ट्रेन महामना एक्सप्रेस का शुभारंभ किया था. यह ट्रेन जिन सुविधाओं से लैस की गई थी, हम सभी को किसी विदेशी ट्रेन का अनुभव कराने के लिए फिलहाल काफी थी. लेकिन आज हम सबों ने इस ट्रेन का जो हाल किया है शायद यह ट्रेन भी मन ही मन पीएम मोदी से यह पूछ रही हो कि ‘‘किन बलात्कारियों के बीच मुझे छोड़ दिया’’.
महामना एक्सप्रेस के अंदर की जो हालिया तस्वीरें सामने आ रही हैं वो हम सभी से एक सवाल कर रही है कि क्या हम बुलेट ट्रेन में चढ़ने के लायक हैं. महामना एक्सप्रेस से जब यात्री उतरते हैं उसके बाद जो दृश्य इस ट्रेन के अंदर का होता है शायद आपको यह ऐहसास करा दे कि यह ट्रेन कूड़ा-कचरा ढोने के लिए बनी है. जबकि इस ट्रेन के हर हिस्से में डस्टबीन मौजूद है.
सवाल बस एक है. क्या हम कभी नहीं सुधरेंगे ?
केवल साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए सरकार दिन-रात एक किए हुई है. केन्द्र सरकार ने ऐसी मुहिम चलाई हुई है कि 24 घंटे में कभी न कभी इसके प्रति जागरूक करने से संबंधित विज्ञापन या संदेश हम-आपको मिल ही जाती है. फिर भी हम हैं कि सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं.
गंदे हम, दोषी पीएम !
आजकल ट्रेंड बन चुका है कि किसी भी तरह की बात हो सीधे दोष पीएम पर मढ़ दो. पीएम ने ऐसा बोला, ये नहीं किया, वो नहीं किया, पीएम केवल भाषण देते हैं करते कुछ नहीं आदि. दोस्तों जितना ही उन्होंने किया है अब तक, क्या हम उन्हीं सुविधाओं का लाभ ले पाने के योग्य हैं. अगर नहीं तो दोषी पीएम नहीं गंदे हम हैं. हमें कोई हक नहीं है पीएम पर दोष मढ़ने का.
एक छोटा सा उदाहरण देश के विकास के बारे में देना चाहूंगा जिनसे समूचा देश अपने पीएम पर गर्व महसूस कर रहा है. पीएम के द्वारा लिये गए फैसलों का ही नतीजा है कि आज हम दूसरे देश को मेक इन इंडिया मेट्रो के डिब्बे एक्सपोर्ट कर रहे हैं. अपने देश में बुलेट ट्रेन पर काम शुरू हो चुका है. कई शहर को स्मार्ट सिटी बनाने पर काम चल रहा है. ऐसे एक नहीं कई फैसले हैं जिनका परिणाम व लाभ आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा. जरूरत है तो बस हमें अपने आप को जागरूक व अपडेट करने का. जरूरत है हर जगह साफ-सफाई का ध्यान रखने का. अगर बुलेट ट्रेन पर चढ़ने का सपना है तो उसके लायक भी बनके दिखाना पड़ेगा.

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