अभी तक यह कयास लगाए जा रहे थे कि इतना सबकुछ होने के बाद कन्हैया राजनीति में अपना करियर बनाएगा. जिस तरह जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद जेएनयू कैंपस से उन्होंने हुंकार भरी इससे इस तरह के कयासों को और बल मिला. लेकिन इस तरह के कयासों पर विराम लगाने के लिए कन्हैया ने एक ताजा बयान दिया है.
कन्हैया ने मीडिया से कहा है कि वह एक शिक्षक बनना चाहता है. लेकिन जिस तरह से वह आंदोलन करने की बात करता है उससे शिक्षक से ज्यादा उसमें एक नेता का गुण ज्यादा दिखाई दे रहा है.
अब सवाल यह उठता है कि अगर वाकई में कन्हैया एक शिक्षक बनना चाहते हैं तो वो अपने नेतागिरी के गुण का इस्तेमाल कहां करेंगे. क्या कन्हैया किसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन करेंगे, चुनाव लड़ने में उनकी मदद करेंगे या फिर शिक्षक बनने का भूत उतरेगा और अपने टैलेंट का इस्तेमाल खुद को चुनाव में उतारने में करेंगे.
आपको बता दें कि जमानत के बाद कन्हैया ने जो भाषण जेएनयू कैंपस से दिया है उसके बाद से लगभग जितने भी एंटी बीजेपी दल हैं उन सभी ने कन्हैया की तारीफ की है. इन लिस्टों में सबसे आगे खड़े हैं दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और हाल ही में बने उनके नए मित्र बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार.
एक बात तो है कि जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया ने अपने टैलेंट से पूरे देश में ऐसा माहौल बना दिया है कि जहां देखो आज उसी की चर्चाएं हो रही है. कन्हैया का अगला कदम क्या होगा इसकी पल-पल की जानकारी न्यूज चैनल्स और अखबारों में प्रकाशित किए जा रहे हैं. अब यह देखना रोचक होगा कि कन्हैया शिक्षक बनते हैं या नेता या शिक्षक बनकर किसी पार्टी विशेष को लाभ दिलाने के लिए नेतागिरी करेंगे.
कन्हैया ने मीडिया से कहा है कि वह एक शिक्षक बनना चाहता है. लेकिन जिस तरह से वह आंदोलन करने की बात करता है उससे शिक्षक से ज्यादा उसमें एक नेता का गुण ज्यादा दिखाई दे रहा है.
अब सवाल यह उठता है कि अगर वाकई में कन्हैया एक शिक्षक बनना चाहते हैं तो वो अपने नेतागिरी के गुण का इस्तेमाल कहां करेंगे. क्या कन्हैया किसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन करेंगे, चुनाव लड़ने में उनकी मदद करेंगे या फिर शिक्षक बनने का भूत उतरेगा और अपने टैलेंट का इस्तेमाल खुद को चुनाव में उतारने में करेंगे.
आपको बता दें कि जमानत के बाद कन्हैया ने जो भाषण जेएनयू कैंपस से दिया है उसके बाद से लगभग जितने भी एंटी बीजेपी दल हैं उन सभी ने कन्हैया की तारीफ की है. इन लिस्टों में सबसे आगे खड़े हैं दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और हाल ही में बने उनके नए मित्र बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार.
एक बात तो है कि जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया ने अपने टैलेंट से पूरे देश में ऐसा माहौल बना दिया है कि जहां देखो आज उसी की चर्चाएं हो रही है. कन्हैया का अगला कदम क्या होगा इसकी पल-पल की जानकारी न्यूज चैनल्स और अखबारों में प्रकाशित किए जा रहे हैं. अब यह देखना रोचक होगा कि कन्हैया शिक्षक बनते हैं या नेता या शिक्षक बनकर किसी पार्टी विशेष को लाभ दिलाने के लिए नेतागिरी करेंगे.

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