जी हां! यह बिल्कुल सत्य है. पूरी दुनिया में इस समय ग्लोबल वार्मिंग, बेरोजगारी, भूखमरी, गरीबी, आर्थिक हालात आदि पर चर्चा हो रही है. यहां हालात ऐसे हैं कि लोगों को दो वक्त की रोटी तक के जुगाड़ करने में कितनी मशक्कत करनी पड़ती है. लोग रोजगार पाने के लिए किस कदर दिन-रात भागदौड़ में गुजार देते हैं यह किसी से छिपा नहीं है. ऐसे समय में जब ऐसी खबरें मिले कि केवल एक शव को जीवित समान रखने के लिए 2 लाख डाॅलर का खर्च होने जा रहा है तो कोई भी एक बार को चैंक जाएगा.

दरअसल, मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक जिस शव के देखभाल की बात हो रही है वह कोई और नहीं बल्कि रूस के कम्युनिस्ट नेता व्लादीमिर लेनिन का शव है. बीबीसी के खबरों की मानें तो रूस की स्टेट प्रोक्योरमेंट एजेंसी की वेबसाइट पर कहा गया है कि इतने बड़े रकम का खर्च करके लेनिन के शव को जीवित समान रखने की कोशिश की जाएगी.
इसके लिए एक एजेंसी का चयन भी कर लिया गया है जो बायोमेडिकल तरीकों से व्लादीमिर लेनिन के शव की देखभाल करेगी. खबरों की माने तो रूसी बायोमेडिकल टेक्नोलॉजी रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर लेनिन के शव की देखभाल सन् 1924 से कर रही है. सन् 1924 में ही पहली बार लेनिन के शव को जनता के दर्शन के लिए मॉस्को के रेड स्क्वेयर में रखा गया था.
हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि इस तरह से इतने सालों से किसी शव की देखभाल के पीछे इतनी बड़ी राशि का खर्च करने का विरोध वहां की लगभग जनता कर रही है. कई बार शव को दफनाने की मांग भी उठ चुकी है.