मैं व्यक्तिगत रूप से सुशासन बाबू की उपाधि प्राप्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी से कहना चाहूंगा कि इन तमाम अव्यवस्थाओं के बावजूद हमें बिहारी होने पर गर्व है. लेकिन बड़े ही दुःख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि हमें बिहारी होने पर गर्व इसलिए नहीं है कि सुशासन बाबू आप बिहार के मुख्यमंत्री हैं.
बिहार में लालू राज के बाद जैसे ही नीतीश कुमार की सरकार सत्ता में आई लोगों को लगने लगा कि अब वे एक नए बिहार में रह रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार व अन्य राज्यों में रह रहे बिहार के लोगों से आह्वान किया था कि वे गर्व से कहें कि वे बिहारी हैं. उनके इस आह्वान का खासा असर भी लोगों पर पड़ा और लोग अपने आप को बिहारी बताने से कतराना छोड़ दिए. जदयू-भाजपा गठबंधन की सरकार बिहार में काफी कारगर साबित हुई. कुछ ऐसे विकास कार्य भी नीतीश कुमार ने बिहार में किए जिसकी बदौलत उन्हें विकास पुरूष तक कहा जाने लगा. देश में बिहार के प्रति लोगों का नजरिया भी काफी बदल चुका था.
फिर एक दौर आया जब जदयू-भाजपा गठबंधन टूटने की कगार पर आ गई और अंततः इस गठबंधन का अंतिम संस्कार कर दिया गया. लेकिन चुनाव में पूर्ण बहुमत पाने के लिए जदयू को किसी न किसी पार्टी का साथ चाहिए था. हालांकि बिहार के करीब 90 फीसदी जनता की मानें तो जैसी छवि नीतीश कुमार की लोगों के मन में बन चुकी थी, अगर जदयू अकेले भी सारी साटों से चुनाव लड़ती तो पूर्ण बहुमत आना तय था. बावजूद इसके शायद असल स्थिति को शरद यादव व नीतीश कुमार भांप नहीं सके और आनन-फानन में राजद के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़े.
सवाल तो शुरू से ही खड़े किए जा रहे थे लेकिन इस समय जदयू-राजद गठबंधन की सरकार में बिहार के जो हालात बन गए हैं लालू-नीतीश जवाब देने की बजाय आंख चुराते नजर आ रहे हैं. अपने राज्य में कानून व्यवस्था कैसे दुरूस्त हो इस मामले में विचार न करके दूसरे राज्यों की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करके लोगों का ध्यान भटका रहे हैं.
मैं व्यक्तिगत रूप से सुशासन बाबू की उपाधि प्राप्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी से कहना चाहूंगा कि इन तमाम अव्यवस्थाओं के बावजूद हमें बिहारी होने पर गर्व है.
लेकिन बड़े ही दुःख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि हमें बिहारी होने पर गर्व इसलिए नहीं है कि सुशासन बाबू आप बिहार के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन हमें बिहारी होने पर गर्व इसलिए है क्योंकि हमने उस राज्य में जन्म लिया जहां बाबू कुंवर सिंह, राजेन्द्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, जगजीवन राम, सैयद हसन ईमाम, रामधारी सिंह दिनकर, सहजानंद सरस्वती, विद्यापति, बिरबल झा, बिस्मिल्लाह खान, बिंदेश्वर पाठक, शारदा सिन्हा, अशोक कुमार जैसे कई महान् और देश को दिशा देने वाले महापुरूषों ने जन्म लिया.
बिहार के तमाम राजनेताओं से बस एक ही आग्रह है कि अपने ही राज्य के महापुरूष देश को इतना सब कुछ दे सकते हैं तो आप सब भी कम से कम बिहार को ही कुछ ऐसा देकर जाओ जिसपर वाकई हमें गर्व हो. आपको यह प्रचार करने की जरूरत न पड़े कि ‘गर्व से कहो हम बिहारी हैं’. ऐसा माहौल बनाना वर्तमान नेताओं के जिम्मे ही है जिस माहौल में हमें खुद ऐसा महसूस हो ताकि हम गर्व से कह सकें कि हम बिहारी हैं.
बिहार में लालू राज के बाद जैसे ही नीतीश कुमार की सरकार सत्ता में आई लोगों को लगने लगा कि अब वे एक नए बिहार में रह रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार व अन्य राज्यों में रह रहे बिहार के लोगों से आह्वान किया था कि वे गर्व से कहें कि वे बिहारी हैं. उनके इस आह्वान का खासा असर भी लोगों पर पड़ा और लोग अपने आप को बिहारी बताने से कतराना छोड़ दिए. जदयू-भाजपा गठबंधन की सरकार बिहार में काफी कारगर साबित हुई. कुछ ऐसे विकास कार्य भी नीतीश कुमार ने बिहार में किए जिसकी बदौलत उन्हें विकास पुरूष तक कहा जाने लगा. देश में बिहार के प्रति लोगों का नजरिया भी काफी बदल चुका था.
फिर एक दौर आया जब जदयू-भाजपा गठबंधन टूटने की कगार पर आ गई और अंततः इस गठबंधन का अंतिम संस्कार कर दिया गया. लेकिन चुनाव में पूर्ण बहुमत पाने के लिए जदयू को किसी न किसी पार्टी का साथ चाहिए था. हालांकि बिहार के करीब 90 फीसदी जनता की मानें तो जैसी छवि नीतीश कुमार की लोगों के मन में बन चुकी थी, अगर जदयू अकेले भी सारी साटों से चुनाव लड़ती तो पूर्ण बहुमत आना तय था. बावजूद इसके शायद असल स्थिति को शरद यादव व नीतीश कुमार भांप नहीं सके और आनन-फानन में राजद के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़े.
सवाल तो शुरू से ही खड़े किए जा रहे थे लेकिन इस समय जदयू-राजद गठबंधन की सरकार में बिहार के जो हालात बन गए हैं लालू-नीतीश जवाब देने की बजाय आंख चुराते नजर आ रहे हैं. अपने राज्य में कानून व्यवस्था कैसे दुरूस्त हो इस मामले में विचार न करके दूसरे राज्यों की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करके लोगों का ध्यान भटका रहे हैं.
मैं व्यक्तिगत रूप से सुशासन बाबू की उपाधि प्राप्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी से कहना चाहूंगा कि इन तमाम अव्यवस्थाओं के बावजूद हमें बिहारी होने पर गर्व है.
लेकिन बड़े ही दुःख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि हमें बिहारी होने पर गर्व इसलिए नहीं है कि सुशासन बाबू आप बिहार के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन हमें बिहारी होने पर गर्व इसलिए है क्योंकि हमने उस राज्य में जन्म लिया जहां बाबू कुंवर सिंह, राजेन्द्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, जगजीवन राम, सैयद हसन ईमाम, रामधारी सिंह दिनकर, सहजानंद सरस्वती, विद्यापति, बिरबल झा, बिस्मिल्लाह खान, बिंदेश्वर पाठक, शारदा सिन्हा, अशोक कुमार जैसे कई महान् और देश को दिशा देने वाले महापुरूषों ने जन्म लिया.
बिहार के तमाम राजनेताओं से बस एक ही आग्रह है कि अपने ही राज्य के महापुरूष देश को इतना सब कुछ दे सकते हैं तो आप सब भी कम से कम बिहार को ही कुछ ऐसा देकर जाओ जिसपर वाकई हमें गर्व हो. आपको यह प्रचार करने की जरूरत न पड़े कि ‘गर्व से कहो हम बिहारी हैं’. ऐसा माहौल बनाना वर्तमान नेताओं के जिम्मे ही है जिस माहौल में हमें खुद ऐसा महसूस हो ताकि हम गर्व से कह सकें कि हम बिहारी हैं.
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