उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां इतनी जोर पकड़ ली है कि लगभग सभी पार्टियों में कुछ न कुछ ऐसी गतिविधियां देखी जा रही है जो पहले कभी नहीं हुआ. चाहे वह बसपा के नेताओं का दूसरे पार्टी में पलायन हो, मंच पर उपस्थित शीला दीक्षित के सामने कांग्रेसियों में लात-घूसे चले हों या सपा में आंतरिक कलह हो. यहां सत्ता में आसीन सपा सरकार में जो पारिवारिक कलह शुरू हुई ऐसा लग रहा है अब शनिवार को उसका अंत हो गया है. लेकिन एकाएक इतना बड़ा घमासान और फिर धीमी होती आंच में फिर से धधक उठना और एकदम से शांत हो जाना, बहुत सवाल खड़े कर रही है. इसके पीछे की असली वजह जानकर आप चौंक जाएंगे.
जानकारों की मानें तो सपा में पारिवारिक कलह के पीछे की असली वजह राहुल गांधी की उत्तर प्रदेश यात्रा है. आगामी चुनाव के मद्देनजर पिछले कई दिनों से राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में जगह-जगह खाट पंचायत और जनसभा को संबोधित कर रहे हैं. दूसरी पार्टियां बिल्कुल भी नहीं चाहेगी कि राहुल गांधी की यह यात्रा सफल हो. सभी विपक्षी पार्टियां अपने-अपने तरीकों से इस यात्रा की निंदा करते नहीं थक रही है. ऐसे में सपा के शीर्ष नेताओं ने जो चक्रव्यूह रचा वह राजनीतिज्ञों के नजरिए से बिल्कुल सटिक और कारगर साबित हुआ है.
असल में जब से सपा का कलह मीडिया में आया है, तब से अखबार, चैनल्स, आॅनलाईन मीडिया सभी जगहों पर कहीं छोटे से जगह में राहुल गांधी की यात्रा के बारे में थोड़ी सी जानकारी मिल जाएगी. लेकिन पिछले कई दिनों से मीडिया में केवल और केवल मुलायम, अखिलेश, शिवपाल और उनके समर्थक ही नजर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि राहुल गांधी की यात्रा और जनसभाओं से मीडिया का ध्यान भटकाने में काफी हद तक सपा सफल रही है.
इस तर्क के पीछे भी एक तर्क दी जा रही है कि अगर ऐसा नही होता तो शुक्रवार शाम तक जो कलह खुशियों में तब्दील हो गई थी और सबकुछ सामान्य हो गया था, अगले दिन सुबह ऐसा लगा जैसे सोयी हुई चिंगारी में किसी ने घी डाल दिया हो. इसके बाद एक बार फिर से खबर आती है कि सबकुछ सामान्य हो गया है. आखिर इतनी बड़ी घमासान से क्या समाधान निकला यह सोच से परे है.
फिलहाल सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के ऐलान के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव को पीडब्ल्यूडी छोड़कर सभी विभाग वापस सौंप दिए हैं. लखनऊ में शिवपाल के आवास पर बधाई देने पहुंचे सीएम अखिलेश ने उनके साथ चाय भी पी.
जानकारों की मानें तो सपा में पारिवारिक कलह के पीछे की असली वजह राहुल गांधी की उत्तर प्रदेश यात्रा है. आगामी चुनाव के मद्देनजर पिछले कई दिनों से राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में जगह-जगह खाट पंचायत और जनसभा को संबोधित कर रहे हैं. दूसरी पार्टियां बिल्कुल भी नहीं चाहेगी कि राहुल गांधी की यह यात्रा सफल हो. सभी विपक्षी पार्टियां अपने-अपने तरीकों से इस यात्रा की निंदा करते नहीं थक रही है. ऐसे में सपा के शीर्ष नेताओं ने जो चक्रव्यूह रचा वह राजनीतिज्ञों के नजरिए से बिल्कुल सटिक और कारगर साबित हुआ है.
असल में जब से सपा का कलह मीडिया में आया है, तब से अखबार, चैनल्स, आॅनलाईन मीडिया सभी जगहों पर कहीं छोटे से जगह में राहुल गांधी की यात्रा के बारे में थोड़ी सी जानकारी मिल जाएगी. लेकिन पिछले कई दिनों से मीडिया में केवल और केवल मुलायम, अखिलेश, शिवपाल और उनके समर्थक ही नजर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि राहुल गांधी की यात्रा और जनसभाओं से मीडिया का ध्यान भटकाने में काफी हद तक सपा सफल रही है.
इस तर्क के पीछे भी एक तर्क दी जा रही है कि अगर ऐसा नही होता तो शुक्रवार शाम तक जो कलह खुशियों में तब्दील हो गई थी और सबकुछ सामान्य हो गया था, अगले दिन सुबह ऐसा लगा जैसे सोयी हुई चिंगारी में किसी ने घी डाल दिया हो. इसके बाद एक बार फिर से खबर आती है कि सबकुछ सामान्य हो गया है. आखिर इतनी बड़ी घमासान से क्या समाधान निकला यह सोच से परे है.
फिलहाल सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के ऐलान के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव को पीडब्ल्यूडी छोड़कर सभी विभाग वापस सौंप दिए हैं. लखनऊ में शिवपाल के आवास पर बधाई देने पहुंचे सीएम अखिलेश ने उनके साथ चाय भी पी.

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