धर्म किसने बनाया, क्यों बनाया, कैसे बनाया, यह मैं नहीं जानता. लेकिन इतना जरूर जानता हूं कि हम सभी को प्रकृति ने बराबर प्रेम दिया है. प्रकृति ने सभी धर्म के लोगों को हवा दी है, पानी दी है, जीने का हक दिया है. इसलिए भेदभाव छोड़ कर जिस धर्म के प्रति बुरा सुने, उससे नफरत करने की बजाय पहले उसके बारे में जानने की कोशिश करें कि आखिर उसमें कितनी सच्चाई है.



इस समय विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव का समय चल रहा है. ऐसे में चुनाव आयोग के सख्त निर्देश के बावजूद अपनी आदत से नेता बाज नहीं आ रहे हैं और जगह-जगह जातिगत राजनीति करने का मौका तलाश रहे हैं और कर भी रहे हैं. ऐसे कई मामले सुनने व देखने को मिले भी हैं और उनके खिलाफ चुनाव आयोग सख्त रवैया अपना भी रहा है.

चूंकि जातपात, भेदभाव, सांप्रदायिक हिंसा, धर्मनिरपेक्ष जैसे शब्द ज्यादातर चुनावों के समय ही सुनने को मिलते हैं इसलिए हमने अपने विषय की शुरूआत राजनेता व चुनाव से की. लेकिन जातपात के नाम पर नफरत का विषय कोई नया नहीं है. इसका अंदाजा लगा पाना बहुत ही मुश्किल है कि यह भेदभाव हमें कितने वर्षों से बर्बादी के कगार पर लिये जा रहा है.

हम अब पहले से ज्यादा पढ़े-लिखे हैं. हमें समाज ने भी बहुत सारी आजादी है. हम पहले से भी ज्यादा बेहतर कर पाएं इसके लिए पुरानी परंपराओं को नए जमाने व नई सोच के हिसाब से बदला भी गया है. कुछ करने की, कुछ कहने की, किसी से सवाल-जवाब करने की हमारे पास पहले से कई गुना ज्यादा आजादी है. लेकिन फिर भी कहीं न कहीं धर्म के मामले में हम कुछ नया सोच पाने की स्थिति में क्यों नहीं हैं ? यह बहुत बड़ा सवाल है.
जहां सवाल इतना बड़ा है वहीं, इसका जवाब और हल काफी सरल है. अक्सर समस्या को जटिल मानकर हम ज्यादा दिमाग खर्च न करते हुए ‘समस्या बड़ी है-समस्या बड़ी है’ का राग अलापते रहते हैं.

हम इस नफरत को भुला सकते हैं. इसके लिए ज्यादा दिमाग खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. बस हमें विपरीत धर्म में अपनी दोस्ती व जान-पहचान बढ़ाने की जरूरत है. इसके पीछे की वजह बिल्कुल स्पष्ट है.
हमारी बुद्धि और विवेक की बात करें तो हमें अब तक यह पता चल चुका है कि किसी भी धर्म के धर्मग्रंथों में नफरत फैलाने की बात तो बिल्कुल भी नहीं लिखी है. बल्कि सभी धर्मों का उद्देश्य लोगों को शांत स्वभाव से रहने का संदेश देना है. कोई भी धर्म किसी को भी नफरत करने, किसी के प्रति छल-कपट रखने, झूठ बोलने, किसी को कष्ट पहुंचाने आदि की सीख कतई नहीं देता है.

हम अक्सर ऐसे कथित धर्मगुरूओं के झांसे में आ जाते हैं जो अपने धर्म की कहानी तो सुनाता है लेकिन दूसरे धर्म की जानकारी न होते हुए भी उसके बारे में गलत प्रचार-प्रसार करता है. अगर हम अपनी बुद्धि-विवेक का इस्तेमाल करें और विपरीत धर्म के लोगों से जान-पहचान बढ़ाएं, उनसे दोस्ती करें, उनके साथ घूमें-फिरें तो उनके बारे में स्वतः ही जानने का मौका मिलेगा.

अगर हम विपरीत धर्म के लोगों से जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर उनका धर्म उन्हें क्या संदेश देता है, तो हमें किसी अफवाह में पड़ने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी. हम यह बखूबी जानते हैं कि कोई भी धर्म नफरत फैलाने का संदेश नहीं देता है, फिर भी दूसरे धर्म को बगैर जाने हम उन धर्म के लोगों से भेदभाव करते हैं.

धर्म किसने बनाया, क्यों बनाया, कैसे बनाया, यह मैं नहीं जानता. लेकिन इतना जरूर जानता हूं कि हम सभी को प्रकृति ने बराबर प्रेम दिया है. प्रकृति ने सभी धर्म के लोगों को हवा दी है, पानी दी है, जीने का हक दिया है. इसलिए भेदभाव छोड़ कर जिस धर्म के प्रति बुरा सुने, उससे नफरत करने की बजाय पहले उसके बारे में जानने की कोशिश करें कि आखिर उसमें कितनी सच्चाई है.

सौ फीसदी इस बात की गारंटी है कि विपरीत धर्म को अगर आप जानने की कोशिश करेंगे तो धर्म के नाम पर की जाने वाली राजनीति, हिंसा, भेदभाव आदि सब आप भूल जाएंगे. आपके बीच बचेगा तो केवल प्रेम, भाईचारा व अच्छे संबंध.