एक समय में बिहार की सियासत का लोहा माना जाता था. ऐसा माना व कहा जाता था कि देश चलाने की जिम्मेदारी किस दल के खेमे में जाएगी यह बिहार से तय होता है. लेकिन एक समय पर आकर ऐसा लगा कि शायद बिहार अपनी इस खासियत को खो चुका है. पूरे देश में जिस समय मोदी लहर दौड़ रही थी, वैसे वक्त पर बिहार ने भाजपा को नकार दिया और राजद-जदयू गठबंधन की सरकार बन गई.
एक बार फिर बिहार की सियासत गरमाई और देखते ही देखते भाजपा-जदयू की सरकार बन गई. राजद को लीड करने की जिम्मेदारी इस समय लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव पर है. तेजस्वी ने विपक्ष की भूमिका को सलीके से स्वीकार किया और अपने उपर लगाए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. हालांकि तेजस्वी के भाषण में उनके अंदर आत्मविश्वास की कमी साफ झलक रही थी.
अब बात आई कि महागठबंधन का क्या होगा. तेजस्वी यादव फिर से लीड रोल में नजर आए और बहुत ही मजबूती से महागठबंधन पर अपने अटल फैसले के रूख को सभी के समक्ष रखा. लेकिन जिस तरीके से हाल ही में महागठबंधन को लेकर हुए समारोह में लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने जो किया वह यह बयां करने के लिए काफी था कि किस तरीके से महागठबंधन की पुंगी बजी है.
तेज प्रताप यादव ने समारोह के दौरान अपने भाषण में अपने पिता लालू यादव के अंदाज में महाभारत के कृष्ण व अर्जुन का जिक्र करते हुए विरोधियों को जवाब देने के लिए शंखनाद करने की बात कही. उन्होंने कहा कि "यहां अर्जुन मेरा छोटा भाई तेजस्वी है. कृष्ण-अर्जुन ने भी शंखनाद किया था. आखिरी लड़ाई तभी होता है जब शंखनाद होता है. आज मैं भी शंखनाद करूंगा और तभी लड़ाई शुरू होगी". जिसके बाद शंख मंगाया जाता है और तेज प्रताप शंख फूंकते हैं. इसके बाद वे सीएम नीतीश, पीएम नरेन्द्र मोदी, आरएसएस पर जमकर बरसे.
तेज प्रताप का प्रयास भाषण के दौरान दिख रहा था. लेकिन टेक्निकल और डिजिटल युग में विकास की बात न कर लड़ाई के लिए शंखनाद की बात करना उनकी निराशा को साफ-साफ दर्शा रहा था. साफ झलक रहा था कि महागठबंधन की पुंगी बजी हुई है और उससे उबारने के लिए शंख फूंका जा रहा है. अब महागठबंधन का क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा.
एक बार फिर बिहार की सियासत गरमाई और देखते ही देखते भाजपा-जदयू की सरकार बन गई. राजद को लीड करने की जिम्मेदारी इस समय लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव पर है. तेजस्वी ने विपक्ष की भूमिका को सलीके से स्वीकार किया और अपने उपर लगाए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. हालांकि तेजस्वी के भाषण में उनके अंदर आत्मविश्वास की कमी साफ झलक रही थी.
इस वीडियो में देखें तेजप्रताप का पूरा भाषण
अब बात आई कि महागठबंधन का क्या होगा. तेजस्वी यादव फिर से लीड रोल में नजर आए और बहुत ही मजबूती से महागठबंधन पर अपने अटल फैसले के रूख को सभी के समक्ष रखा. लेकिन जिस तरीके से हाल ही में महागठबंधन को लेकर हुए समारोह में लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने जो किया वह यह बयां करने के लिए काफी था कि किस तरीके से महागठबंधन की पुंगी बजी है.
तेज प्रताप यादव ने समारोह के दौरान अपने भाषण में अपने पिता लालू यादव के अंदाज में महाभारत के कृष्ण व अर्जुन का जिक्र करते हुए विरोधियों को जवाब देने के लिए शंखनाद करने की बात कही. उन्होंने कहा कि "यहां अर्जुन मेरा छोटा भाई तेजस्वी है. कृष्ण-अर्जुन ने भी शंखनाद किया था. आखिरी लड़ाई तभी होता है जब शंखनाद होता है. आज मैं भी शंखनाद करूंगा और तभी लड़ाई शुरू होगी". जिसके बाद शंख मंगाया जाता है और तेज प्रताप शंख फूंकते हैं. इसके बाद वे सीएम नीतीश, पीएम नरेन्द्र मोदी, आरएसएस पर जमकर बरसे.
तेज प्रताप का प्रयास भाषण के दौरान दिख रहा था. लेकिन टेक्निकल और डिजिटल युग में विकास की बात न कर लड़ाई के लिए शंखनाद की बात करना उनकी निराशा को साफ-साफ दर्शा रहा था. साफ झलक रहा था कि महागठबंधन की पुंगी बजी हुई है और उससे उबारने के लिए शंख फूंका जा रहा है. अब महागठबंधन का क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा.

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