हम कोई सजने संवरने का सामान थोड़े ही ना हैं कि बिखेर दो और हम बिखर जाएंगे।

वक्त के आगे थोड़े मजबूर जरूर हैं पर देखना एक दिन फिर से हम ही हम नजर आएंगे।।