वफाएं छोड़ दी हैं मैंने कि अब शक कि गुंजाइश न करना.
दिन में भी गिनता हूं तारे कि अब चाँद की ख्वाहिश न करना.
आहट भर से तेरी राह में खुशबू बिछा दूंगा, बस इतना करना.
चल पड़ा हूं अंधेरे में कि अब उजाले की पैमाइश न करना.