पेड़ की छांव में बिताया वो शाम आज भी याद है मुझे
तुम्हारा यूं मुस्कुराकर धीरे से पास आना भी याद है मुझे
फिर हल्के हाथों से मुझे छूकर जो तूम भाग जाती थी
मैं आंचल पकड़ता था फिर तुम आंचल को छुड़ाती थी
थोड़ा शर्माती थी, फिर पास आ के मुझे चिढ़ाती थी
उन लम्हों को तुम्हारा सजाना आज भी याद है मुझे
पेड़ की छांव में बिताया वो शाम आज भी याद है मुझे
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एक भी शाम बता दो जब नहीं मिलती थी मुझसे
चाहे वो दिन हो या रात तुम मिलती थी मुझसे
वादा था यह प्यार जीता रहेगा तुम मिलो न मिलो
खुश तो हो ना तुम, सालों से बात भी नहीं की हो
जानती हो कि प्यार में हर कोई सफल नहीं होता
प्यार का अंतिम मंजिल विवाह का संबंध ही नहीं होता
तुम्हारा रूठना, फिर मेरा मनाना भी क्या याद है तुम्हे
पेड़ की छांव में बिताया वो शाम आज भी याद है मुझे

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