सफेद पन्नों पे काले दागों का दर्द दिख जाए
सोच रहा हूं आज ऐसा कुछ लिख जाऊं

आंख में आंसू और चेहरे पर शिकन आ जाए
समझ नही आता कौन सी स्याही चलाऊं

ऐसी ताकत काश मेरी उंगलियों में आ जाए
बदूंक की गोलियों से भी तेज कलम चलाऊं

हर दर्द और गम दुनिया से गायब हो जाए
ऐ मौला तू ही बता ऐसी कौन सी छड़ी घुमाऊं