जिंदगी की नींव में ईंटे कम पड़ने लगी है,
सोचा था सीढि़यां बनाऊंगा मंजिल तक,
क्योंकि सफलता आसमान सी लगने लगी है,
अब तो जिंदगी वीरान सी लगने लगी है।
हमने तो हर मोड़ पर बीज बोए थे फूल के,
खुशबू लेने की बारी आई पौधे दिखे बबुल के,
अब तो कांटों से भी खुशबू सी आने लगी है,
अब तो जिंदगी वीरान सी लगने लगी है।
उस पथ पर चला था अकेला ही मैं मगर,
हमें क्या पता इस राह के भी राही अनेक हैं,
गाए पथिक सारे एक ही सुर में जाए जा रहे थे,
अब तो जिंदगी वीरान सी लगने लगी है।
घमंड था अपने रूतबे का कुछ समय पहले,
आज रूतबे के साथ घमंड भी गायब है,
खो देना पहचान अपनी भूल सी लगने लगी है,
अब तो जिंदगी वीरान सी लगने लगी है।
विश्वास खुद पर अब इतना तो तय है,
नीचे इतना आने के बाद उठना तो तय है,
क्योंकि हीरे जैसी कुछ खुद में दिखने लगी है,
अब तो जिंदगी वीरान सी लगने लगी है।
सोचा था सीढि़यां बनाऊंगा मंजिल तक,
क्योंकि सफलता आसमान सी लगने लगी है,
अब तो जिंदगी वीरान सी लगने लगी है।
हमने तो हर मोड़ पर बीज बोए थे फूल के,
खुशबू लेने की बारी आई पौधे दिखे बबुल के,
अब तो कांटों से भी खुशबू सी आने लगी है,
अब तो जिंदगी वीरान सी लगने लगी है।
उस पथ पर चला था अकेला ही मैं मगर,
हमें क्या पता इस राह के भी राही अनेक हैं,
गाए पथिक सारे एक ही सुर में जाए जा रहे थे,
अब तो जिंदगी वीरान सी लगने लगी है।
घमंड था अपने रूतबे का कुछ समय पहले,
आज रूतबे के साथ घमंड भी गायब है,
खो देना पहचान अपनी भूल सी लगने लगी है,
अब तो जिंदगी वीरान सी लगने लगी है।
विश्वास खुद पर अब इतना तो तय है,
नीचे इतना आने के बाद उठना तो तय है,
क्योंकि हीरे जैसी कुछ खुद में दिखने लगी है,
अब तो जिंदगी वीरान सी लगने लगी है।

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