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"दो शब्द दिल से"
चाह बस इतनी है कि राह में कहीं तू मिल जाए
चाह बस इतनी है कि राह में कहीं तू मिल जाए
Karunesh Kaithal
7:09:00 am
चाह बस इतनी है कि राह में कहीं तू मिल जाए
धड़कन की आखिरी गिनती तक एक गुलाब थमाए!
प्यार-व्यार सब छल-कपट का खेल है जानेमन
दोस्ती ऐसी हो कि यम भी मुझे तुझसे छीनने में शर्माए!!
"दो शब्द दिल से"
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